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Poem, Poetry & Short Stories

कविता: ज़रा सुनिए तो A Short Poetry Depicting #SoundOfLove

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This is a short poem depicting #SoundOfLove

ये आहट है तेरे चलने की या ख्वाबों का है सिलसिला

ना कभी बिसरी थी ना बिसरी है ना बिसरेगी

मैं ठहर ठहर के चलता रहा तू चलते चलते ठहर गया

ये समां तेरे आने से कितने रंगों से भर गया

जहाँ जहाँ सजाये तेरी यादों के ख्याल

ज़िन्दगी के सफ़ेद पन्ने तेरी तस्वीरों से भर गए

समंदर के किनारे गीली रेत में चलते चलते

तेरी आँखों में पूरा समंदर समा गया

ये जो कब से संग संग चलता रहा उदासी का सबब

तेरे आते ही फुर्र से कहाँ गया

मैं तो तब से कायल हो गया

सुबह के तारे की तरह

भोर की पहली किरन पड़ते ही

जाने कहाँ जा कर चुपके से सो गया

तुझसे मिलने के बाद

मन होते होते दीवाना हो गया

मैं तो तब से कायल हो गया

चलो ख्यालों की, सपनोँ की, ख्वाबों की बातें करें

एक बार फिर से रात रात भर बैठ कर बातें करें

झिलमिलाते मुस्कुराते आँखों में जगमगाते जुगनू

चाँद के आस पास बिखर के

सितारे खाली आसमान की चादर को सजाने की होड़ में

गाते चले गुनगुनाते चले

सफर ऐसा हो तो कितना भी लम्बा हो तकलीफ नहीं होती चलने में

तुम हो साथ में तो सच्चाई के रंगीन परदे

बातों की बेज़ुबान खिड़कियों पर

देर नहीं लगाते सजने में

#SoundOfLove
Photo credit: Thomas Hawk via Visualhunt / CC BY-NC

तेरी यादों की दराजों में, ख्यालों की अलमारियों में

संजों के तह लगा कर रखे हैं एक कोने में

इस उम्मीद में की कभी उम्र की ढलान पर

नज़रों के अक्स धुंधलाने लगेंगे अगर

ये कोने में संजो कर रखी किताबों के पन्नों में

सिर्फ दो ही हर्फ़ नज़र आएंगे

इक तेरा नाम

इक मेरा नाम

#SoundOfLove

तुम्हे यकीन होता हो या न होता हो

वक़्त आने पर आज़मा लें तुम भी

हवाओं के हाथ में अपने हाथ लहरा कर देखना

मेरा हाथ अपने आप तुम्हारे हाथों में होगा

तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान की कोपलें

खुद ब खुद लाएगा

आँखों में कुछ पल के लिए

वो लम्हा उतर आएगा

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