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Poem, Poetry & Short Stories

नाम अगर बदनाम है तो दाम ज़्यादा है वर्ना नाम में क्या रखा है #NAME

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पहले मैं भी सोचता था की नाम में क्या रखा है

मगर वक़्त के साथ साथ ये सोच बदलने पर मजबूर

हो गया हूँ मैं।

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कुछ नाम जन्म के साथ जन्मते हैं और

इंसान के मरने के साथ मर जाते हैं

इनमें से कुछ अगर एक साथ नहीं मरते

तो ज़्यादा वक़्त तक रहते भी नहीं हैं।

कुछ वक़्त बीतने के साथ मर जाते हैं।

मसलन कुछ वक़्त बाद उन नामों का ज़िक्र भी होना

बंद हो जाता है

और कुछ और वक़्त बीतने के बाद

ज़ेहन से भी उतर जाता है

नाम भी और शक्ल भी।

मगर कुछ नाम हैं जो जीते हैं

बरसों तक

और उनमें से कुछ तो शताब्दियों तक

या उस से भी परे।

 

मोटे मोटे ये नाम या तो होते हैं राम की तरह

या फिर रावण की तरह।

राम के वजूद के होने में

और सीता के वजूद के मिटने में

रावण का बहुत बड़ा हाथ है

एक राम है जिसने सीता को छोड़ा

रावण की वजह से

एक मंदोदरी है जिसने रावण को नहीं छोड़ा

सीता से बदसलूकी के बावज़ूद

नाम
Photo credit: ISKCON Desire Tree via VisualHunt / CC BY-NC-ND

दशहरा एक बाहर बड़ी मिसाल है इन दो नामों की

एक नाम राम का जो सिर्फ रामलीला तक नज़र आता है

दूसरा नाम रावण का जो भारी मात्रा में एवं बड़ी मात्रा में

बिकता नज़र आता है।

जो भारी मोल भाव में बिकता है

और फिर पल भर में ख़ाक हो जाता है

कीमत और तादाद फिर भी उसी की रहती है

साल दर साल।

उम्र के ये एक बहुत बड़ा तजुर्बा है

नाम है तो है नहीं है तो नहीं है।

फर्क ये नहीं पड़ता कि कौन कितना लम्बा जीता है

फर्क ये पड़ता है की कौन कितने विश्वास के साथ जीता है

बल्कि आत्मविश्वास के साथ।

नाम के मायने

और

नाम की एहमियत

शायद उसी से

बढ़ते हैं

और

घटते हैं।

नाम की एहमियत

शायद।

या शायद नहीं।

 

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