Education & Development, Social Responsibility

बाल शोषण के लिए आप हैं बराबर के ज़िम्मेवार – ज़रा सोचिये

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जी हाँ बाल शोषण के लिए आप भी उतने ही ज़िम्मेवार हैं जितना की आप किसी और को मानते हैं। आप चाहे एक शिक्षक हों, माता या पिता हों, या फिर सभ्य देश के सभ्य नागरिक हों। आप का ज़िम्मा केवल सरकार या पुलिस की तरफ ऊँगली उठाना नहीं है। बल्कि आपको एक उत्प्रेरक की भांति कदम से कदम मिला कर चलना होगा. ये किसी एक की चिंता का विषय नहीं है। ये हम सभी की चिंता का विषय है। इसी लिए हम सब को मिल कर इसके हल का बीड़ा उठाना होगा। कब तक हम बाल शोषण जैसे विषय को गंभीरता से परे रख कर रह सकते हैं। आने वाली पीढ़ी को हमें ही जवाब देना है इस बारे में।

अगर आप एक माता या पिता है तो क्या आपके बच्चे को ये जानना ज़रूरी नहीं है की अगर कोई जान पहचान वाला या अनजान व्यक्ति उसका नाजायज़ फायदा उठाना चाहता हो तो उन हालात में उसे क्या करना चाहिए? क्या आप चाहेंगे कि इस तथ्य से अनजान रख कर आप अपने बच्चे का नुक्सान होने में शामिल हों? और इस उनभिज्ञता की वजह से एक मासूम बच्चे को उम्र भर एक मानसिक बोझ के साथ जीना क्या उचित होगा?

बाल शोषण Child Abuse
Photo credit: Dhammika Heenpella / Images of Sri Lanka via VisualHunt.com / CC BY-NC

एक शिक्षक का भी अपने छात्रों के प्रति येही कर्त्तव्य है। और देखा जाये तो बाल शोषण करने वाले भी हमारे समाज का ही एक हिस्सा हैं। उनका मानसिक विकास अगर वक़्त रहते हो गया होता तो शायद आज वो एक अपराधी न हो कर समाज का एक ज़िम्मेवार हिस्सा होते।

बाल शोषण और मानसिक विकास

बाल शोषण एक गंभीर समस्या ही नहीं अपितु एक सामाजिक कलंक है। जब हम विकास और प्रगति की बातें करते हैं तो सबसे पहले हमें इस तरह की सभी मानसिक बिमारिओं से पार पाना होगा। वर्ना विकास की जगह हम अविकास की रह पर ही चलते रह जायेंगे। क्यूँकि अविकसित दिमाग के रहते देश का विकास तो क्या अपना विकास ही असंभव है।

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