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कुछ बातें अनकही सी – A Short Poetry in Hindi

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कुछ बातें अनकही सी

अब ठीक से याद भी नहीं है
तुम से कहा था या यूं ही चला आया था

कुछ बातें अनकही सी
इस लिए रखता हूं वो सारी बातें
बिस्तर के पास की दराजों में
जिन पर मिटते अक्षरों में लिखा है
कुछ बातें अनकही सी।

कुछ बातें अनकही सी

कुछ बातें अनकही सी
Photo via Visual Hunt

कभी बचपन की सनी यादों को
ढूंढते ढूंढते इन दराजों को खोलो
तो हवा का पहला भभका एक अलग
सी महक लायेगा
बस उसी में लिपटी होंगी
कुछ बातें अनकही सी।

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